CoViD
माना घड़ी थोड़ी मुश्किल है,
ये रात थोड़ी लम्बी है,
पर सूरज तो निकेलगा,
ये बादल क्या छुपाएंगे,
भाप के गुब्बारे है,
तपिस से मर जायेंगे,,
ये रण है लड़ना तो होगा,
रण क्षेत्र रचना भी होगा,
की तीर लगे निशाने पर,
ये जिम्मेदारी है हम सब पे,
बस कल ठहर जाना घर पे,,
हाँ कुछ मुश्किल तो होंगी,
कुछ हलचल भी होगी,
पर ये न हो जाये,
किसी दिहाड़ी की दिहाड़ी मर जाये,,
रचना-पवन