प्रेम की मधुर धुन | Dandiya Night Prem kahani
पहली मुलाक़ात की बारिश सी आई,
भीगती यादों में खुशबू समाई।
तेरी हँसी में था कोई जादू,
सांसों में जैसे सजी नई बांसुरी।
तेरी आँखों में कुछ अनकही बातें,
हर शाम संग तेरी बनती थी रातें।
डांडिया की थापों में धड़कन बजी,
जैसे प्रेम की सरगम धीरे-धीरे बसी।
तू है धड़कन, तू ही साज़ है,
तू ही मेरा हमराज़ है,
सात जन्मों की ये डोरी,
रिश्तों में बंधी एक प्रीत की छोरी।
सितारों की छाँव में जब तू थी पास,
दिल में बजी इक मीठी सी राग।
बिना कहे भी सब कुछ सुन लिया,
तेरी साँसों का मुझसे वादा हुआ।
तेरे गीतों में बसी थी मेरी दुनिया,
हर धुन में मैं थी, हर राग में तू था।
बाँसुरी की मिठास, गिटार की गूँज,
हम दोनों का प्रेम एक सुंदर सृजन।
अब दूर भी जाएँ, तो पास ही रहेंगे,
हर धड़कन में इक एहसास ही रहेंगे।
तेरी मेरी कहानी, रहेगी अमर,
जैसे सुरों में रचा प्रेम का नगर।
चले चाहे कहीं भी, राहें बदल जाएँ,
दिलों की ये बातें कभी ना मिट पाएँ।
एक प्रेम गीत, तेरा और मेरा,
हर जन्म में संग, हर सुर में बसेरा।
– प्रवेश मौर्य ✍️