हार या जीत
“हार या जीत”
बहादुरी से
सामने से
सीने पर खाकर / दुश्मनों का वार
अगर कोई सैनिक
हार भी जाता है
कोई युद्ध
तो भी उसकी ये हार
नहीं कहलाती हार
दुनिया इस विजेता
की मौत पर
करती है जयजय कार ||
अगर कोई मक्कारी से
नियमों के खिलाफ
चालाकी से / कायरता से
पीठ पर गोली खाकर
दुश्मन को पीठ दिखा कर
लहराता है अपना परचम
फिर भी उसकी ये जीत
नहीं कहलाती है जीत
ऐसी विजय भी होती है हार
खोलती है वुज़दिली के द्वार
ऐसी जीत को धिक्कार / ऐसी विजय को दुत्कार ||