चाय और चौपाल

वो सर्द शामें दोस्तों का हाथ थामें गाँव के चौपाल फर मिलते थे

चार प्यालें चाय के साथ लेकर नयी पुरानी बातें किया करते थे

एक चुस्की चाय के साथ कई घंटे बीता करते थे,हंसी,खुशी और मस्ती के साथ ठहाके लगाया करते थे।

दोस्तों अशके साथ दिन से दोपहर और उन्ही के साथ चौपालों पर शामें ढला करती थी, सच में उन मुलाकातों में जिन्दगी मुस्कुराया करती थी।

अब वो हंसी खुशी के लम्हें जिन्दगी को तन्हा कर जाते है

अब कोई दोस्तत नहीं बुलाता और हम भी अब किसीसे मिलने नहीं जाते।

 

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