बीत रहा जीवन
बीत रहा जीवन
संघर्षों–संग्रामों में
अनछुए मुकामों में
दौड़–भाग; आपा–धापी में
किताब और कॉपी में ।
संजो रहा हूँ
निभाये हुए साथ; अपनों के हाथ
अनुभवों की थाती; मीत की पाती
मिले हुए संत्रास; कुछ विकृत उपहास
खुशियों की मृगमरीचिका; दर्द से सजी वीथिका ।
यही पूँजी कमाई है; यहीं पर पाई है ।
अब
एक सूनापन भर रहा है;
जिसका शोर बहरा कर रहा है ।
आते–जाते; रोते–रुलाते
बीत रहा है जीवन ।।