बीत रहा जीवन

 

बीत रहा जीवन

संघर्षोंसंग्रामों में

अनछुए मुकामों में

दौड़भाग; आपाधापी में

किताब और कॉपी में

संजो रहा हूँ

निभाये हुए साथ; अपनों के हाथ

अनुभवों की थाती; मीत की पाती

मिले हुए संत्रास; कुछ विकृत उपहास

खुशियों की मृगमरीचिका; दर्द से सजी वीथिका  

यही पूँजी कमाई है; यहीं पर पाई है

अब        

एक सूनापन भर रहा है;

जिसका शोर बहरा कर रहा है

आतेजाते; रोतेरुलाते

बीत रहा है जीवन ।।

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Rajesh C Verma