Ma ki Paati

माँ की पाती

उस दिन मिली

पुराने कागज़ों में

माँ की पाती

अब

मेरे लिये बन गई

अनमोल थाती

पाती में थे मोती से अक्षर

और

 गुँथे हुए नेहपगे शब्द

शब्द

कुछ देर के लिये धुँधला से गये

शायद

आँखों का पानी छलका से गये

संजोया था,

पाती में माँ का मन

दर्द, चिन्ताएँ कुछ उलझन

वो उलझनें अब सुलझाऊँ

कैसे ?

माँ को अब पाऊँ

कैसे ?

 

दौड़ रहा हूँ भटक रहा हूँ

जीवन के मेले में

उन्हे खोज रहा हूँ

 

रे मन मत हो उदास

माँ है यहीं कहीं

आसपास ।।

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Rajesh C Verma