“वक्त”

“वक्त”

वक्त है हम सब का रब,

वक्त है जो सिखाता है हमको सब।

वक्त की जिसने भी न की हो ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌कद्,

वह खोदता है सिर्फ अपनी कब्र।

वक्त अच्छा, बुरा बोल कर नहीं आता,

वक्त कभी खुशी तो कभी गम है लाता।

वक्त बना सकता ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌है आपका बिगाड़ा हुआ ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌काज,

वक्त बिगाड़ सकता है आपका बना हुआ ताज।

वक्त के आगे तो कम पड़ जाते हैं अलफाज,

और वक्त से पहले तो वो खुदा भी नहीं सुनता आपकी आवाज।

राजेश मीरचंदानी

कोलकाता

राजेशमीर४@gmail.com

rajeshmir4@gmail.com

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Rajesh Mirchandani