मां तुझे समझने की

मा तुझे समझने की मुझमें
कूवत ही कहां है…
मेरे होश में आने से कितना पहले
जुट गई तुम,- मेरी तैयारी में
दर्द सहा चलती रही हसती रही
न कोई कोताही मेरी तैयारी में,
          मै आया मांस का टुकड़ा सा
          सीने से लगाया – मुझे बनाया
          कितनी रातें काटी- मेरी बीमारी पर
          आंखो ही आंखो में,
           कितने दरगाह- शिवाले देखे
           मेरी सलामती की दुआ लेकर,
मेरे लिए किस से नहीं लड़ी तुम
घर बाहर और जादू टोने तक
अपनी जान की कब सोची
तुम तो जीती ही रही मेरे खातिर…
                                                  रमेश 

 

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Ramesh Sharma