दिल से एक बार फिर बच्चा होना चाहता हूँ

जब तक दिल बच्चा था,

चंचल मन तब तक सच्चा था,

आज का जीवन सार लिख रहा हूँ,

जीविका के लिए ही सही,

लेकिन सच है बिक रहा हूँ

कई दशक जियें हैं मैंने,

अनचाहे समझौते किये है मैंने,

जमाने को देखा है बदलते हुए,

अंधेरा भगाती भौर देखी है,

देखा है सूरज को ढलते हुए,

दुः खी हूँ नाराज़ हूँ सभी से,

कर्मग्नि जला रही है,

मृत्यु सइया पर हूँ अभी से,

जो कभी अपना था ही नहीं,

खुश था उस आशियाने के लिए,

जन्मभूमि को छोड़ दिया,

चंद काग़ज़ के टुकड़े कमाने के लिए,

जिसने पाला जिसने जन्म दिया,

उन्हें ही अकेला छोड़ दिया,

अब अकेलापन दुः खता है मुझे,

जब मेरे बच्चों ने मुझे छोड़ दिया,

माँ के आँचल के लिए फिर रोना चाहता हूँ,

दिल से एक बार फिर बच्चा होना चाहता हूँ।

(Ravinder Guru)

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Ravinder Singh Chandila