आत्मपरिचय
है उम्मीद खुद से मुझे कि
वक्त सही हो जब मैं काम करूं या
सही वक्त पर करूं काम सही ।
है कुछों में ऐसी विशेषता जो मुझमें नहीं
है उम्मीद खुद से मुझे ,हो
ऐसी विशेषता मुझमें कभी।
है उम्मीद खुद से मुझे कि
सीख लूं मैं इतना इस जीवन में
सीख रहित न रह जाऊं इस जीवन में |
है उम्मीद मुझे इस जीवन से
बतला दे वह राह तू जिससे मैं
ना भटकूं अगले जीवन में ।
है उम्मीद मुझे जीवन से मेरे कि
पुण्य कर्म करना सिखा दे,
बना सकूं मैं एक मिसाल ,बन सकूं
पुण्यता के काबिल अगले जीवन में ।
है उम्मीद खुद से मुझे , हे! ईश्वर
आवाज़ इतनी सुरीली दे कि
व्यर्थ ना लगे आवाज़ मेरी
खुद को मुझे अगले जीवन में ।
है उम्मीद खुद से मुझे कि
करूं प्रमाणित मैं अपने जज्बे को, दृढ़ता को
कुछ इस्कदर कि प्रमाण शब्द भी
स्वयं गुम जाए मेरे अगले जीवन में।
प्राप्त करूं वह सारे लक्ष्य
है उम्मीद खुद से मुझे कि
बाकी न रह जाए कुछ ध्येय
प्राप्ति के लिए अगले जीवन में ।।
।।धन्यवाद ।।