मैं कुछ नहीं मांगूंगा
जिंदगी की कहानियों में आँसुओं का सौदा है,
जीने-मरने का सिलसिला हर रोज़ खुलता है।
संघर्ष का रास्ता चुना है, तकलीफ़ तो आएगी ही,
भीड़ के साथ चलता तो, सब साथ देते मेरा।
अब जब अकेला पड़ गया हूँ, तो पीछे हटुंगा नहीं।
परेशानी कितनी भी आए, कर्म छोडूंगा नहीं।
देखना एक दिन, यह फ़ैसला बनेगा पहचान मेरी।
परिश्रम की आदत में अविरत,
मेरा लक्ष्य हैं स्पष्ट, हैं सदैव विधिवत।
नहीं हैं मेरा ध्येय, किसी भी प्रतिष्ठा को हासिल करना, मुझको रोज़ जीवन की चुनौतियों से हैं उभरना।
मेरे सपनों की नहीं कोई सीमा है,
मेरा उल्लेख केवल स्वाभिमान और समर्पण है,
सम्मान की प्राप्ति नहीं है लक्ष्य मेरा,
केवल कठोर प्रयत्न है मेरा।
प्यार की मांग नहीं, उपहार नहीं मांगूंगा ,
कर्त्तव्यों की गहराई में, पीछे क़दम नहीं हाकूंगा,
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।
धड़कता है यह समाज, हर पल जीवन की राह पर,
उम्मीदों का पर्व, ख्वाबों से निकल कर।
स्वयं के लिए आजतक तो पशु पक्षी भी लड़ते है आए,
पर असली संघर्ष वही है जो सबके हित के लिए किया जाए ।
क्यों मांगूं कुछ अत्यंत, क्यों चाहूँ मैं विशेष?
कर्म का पाठ यहाँ सिखलाता है,
मेरे मन को समझाने की आवश्यकता है।
ज्ञान चक्षु के पर्दे खोलना हो,
अन्धकर से प्रकाश की ओर बढ़ना हो।
मैं कोई एहसान नहीं मांगूंगा,
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।
मेरा संकल्प, मेरी मान्यता।
न एहसान चाहूंगा, न श्रेष्ठता।
जैसे जीवन निरंतर संघर्ष का नाम है,
मेरा संकल्प सुनसान राहों पर ही बना है।
मेरा सत्य स्वयं की जिम्मेदारियों में ही छुपा है,
अपने कर्त्तव्य को में जो भूलकर चला,
चाहे मुझे कठिनाइयाँ मिलें, मैं हर हाल में सहन करूंगा।
मैं अपने रास्ते की सभी बाधाओं को दूर कर दूंगा,
लेकिन मैं दया की याचना नहीं करूंगा,
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।
प्रेरित होकर अन्यों के लिए काम करता हूँ,
समर्पित, सजीव, प्रेम से जीता हूँ,
संघर्ष की राह में, प्रेरित होकर चलता हूँ,
मेरी भावनाओं को मीत बना रहता हूँ,
मैं ख़ुशी के पलों की यादें संजोता हूँ,
कठिनाई के समय में भी,
यहाँ तक कि अपने सबसे अंधकारमय क्षणों में भी,
मैं भौतिक संपत्ति की तलाश नहीं करूंगा,
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।
हार कर भी मैं हार नहीं मानूंगा,
आसमान से भी ऊंचा सपनों को पा लूंगा।
प्रेरणा से परिपूर्ण यह सफ़र है,
साहस से होकर, हर मुश्किल को परास्त करूंगा।
कुछ माँगने की आकांक्षा नहीं,
मेरे कलेजे में हमेशा हिरास होती नहीं।
सुखमय पलों के साथ, मुसीबतों के दौर में,
मैं किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मांगूंगा।
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।
प्रगति पथ पर चुनौतियों का स्वागत है।
मैं चुनौतियों से डरूंगा नहीं ,
संघर्षों से मेरी महानता कम होगी नहीं ,
मैं आराम के लिए अपनी प्रतिबद्धता नहीं छोड़ूंगा।
मैं किसी विशेष उपचार की मांग नहीं करूंगा,
यदि मुझे श्राप भी दिया जाए तो भी बना रहूँगा।
मैं अपने कर्त्तव्य पर दृढ़ ,अपना स्वरुप में उजागर करूंगा,
मैं चापलूसी या अपमान से प्रभावित नहीं होऊंगा।
मैं कोई विशेष सुविधा नहीं मांगूंगा,
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।
मैं कुछ नहीं मांगूंगा।