मैं कौन हूं??
मेरा प्रतिबिंब पूछे, कि मैं कौन हूं?? क्यों इस क़दर मैं मौन हूं, ना चोट लगती है, ना एहसास होता है, चाहे कोई कितना मुझसे दूर या पास होता है, रक्त बह जाए इक दफा, मगर सूखा सर्वत्र व्याप्त है, जैसे इंसान नहीं, कोई मशीनी ड्रोन हूं, हुई इस कदर मैं मौन हूं, मेरा प्रतिबिंब पूछे, कि मैं कौन हूं???