Zindagi

ये वक़्त का दरिया खत्म नहीं होता…

टपकती बूंदों का सिलसिला अब इस दिल में ज़ब्त नहीं होता,

तैरना नहीं आता….

फिर भी गोते लगाकर थक चुकी हूं,

ऐ ज़िन्दगी!!!

तुझे काटते काटते तो मैं खुद कट चुकी हूं।

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sharmavashudha07