Zindagi
ये वक़्त का दरिया खत्म नहीं होता…
टपकती बूंदों का सिलसिला अब इस दिल में ज़ब्त नहीं होता,
तैरना नहीं आता….
फिर भी गोते लगाकर थक चुकी हूं,
ऐ ज़िन्दगी!!!
तुझे काटते काटते तो मैं खुद कट चुकी हूं।
ये वक़्त का दरिया खत्म नहीं होता…
टपकती बूंदों का सिलसिला अब इस दिल में ज़ब्त नहीं होता,
तैरना नहीं आता….
फिर भी गोते लगाकर थक चुकी हूं,
ऐ ज़िन्दगी!!!
तुझे काटते काटते तो मैं खुद कट चुकी हूं।