Jid hai agar to jeetoge
उठ तैयार हो फिर हरबार
जितनी बार भी तुम गिरोगे
जिद है अगर तो जीतोगे
चाहे वक़्त ना हो साथ
भले छुटे अपनों का हाथ
हर अंधियारा दूर कर देगा नाथ
सूखे में भी आंसुओं से जब
अपने सपनों को तुम सींचोगे
जिद है अगर …
माना जीत जाना नहीं होता आसान
पर जिद से बड़ी ना कोई चीज बलवान
जिद है साहस और जिद ही संयम
मंजिल तक अड़े रहो तो जिद है अनुशासन
बन के मशाल कर तू जग को रोशन
कभी मिटने ना पाए जब ऐसी लकीरें खींचोगे
जिद है अगर तो जीतोगे