हम अकेले ही निकले

तुमने कदम तो बढ़ाया साथ ही
पर अपनों में ही फितने निकले

लड़ने चले थे हम लेकिन
राजनीति के ठेके निकले

निस्वार्थ भाव से सेवा करने में ,
कुछ मतलबी भी अपने निकले

शांति की बात में भी
कुछ अशांत अपने निकले

जब निकले विरोध करने
तो सभी के साथ निकले

पर विरोध के प्रदर्शन में
सबसे आगे हम अकेले ही निकले

राजनीति के दाग़ में भी
हम अकेले ही निकले
                  ~ रंजन





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shawranjan1998