मिल करे सामना
आज आसमा आंसू है झर झर बहा रहा
आई है विपदा मानव हिम्मत दिखा रहा
प्रकृति है बेबस बेचारी कुछ करना पाई
कहर कुदरत को इंसान की लापरवाही बुला लाई
खनिज गर्भा को खोद खोद कर किया हमने खाली
काट काट कर पेड़ों को पर्यावरण को किया बेकारी
पूरा संसार त्रस्त हुआ देखो कोरोना की आंधी
अभी भी ना संभले तो होगी और ज्यादा बर्बादी
धू-धू कर जल रहा देखो मानवकृत अविष्कार
हाहाकार मचा मन घबराया अब आगे क्या लेगा आकार
मुश्किल की इस घड़ी में भूलों सब द्बेष भाव
आओ सब मिलकर करें कोरोना को निष्प्रभाव
शोभा गोयल