जिंदगी की मुश्किलें
ए जिंदगी! तू देती है कैसी- कैसी दुविधाएँ,
तो इन दुविधाओ का जवाब भी दे जरा मुझे।
ए जिंदगी! तू क्यों ले रहा परीक्षा मेरी हर घड़ी,
तेरी इन ही परीक्षाएँ ने कभी-कभी कर देती हैं मुझे कमज़ोर।
ए जिंदगी! तू मुझे मुश्किले देके क्या साबित करना चाहता है,
ये मुश्किल करा देती थी मुझे अन्दर से डरा- सेहमा सा महसूस।
ए जिंदगी! तू मेरे दिल की बात को समझेगा कभी या नहीं,
हर बात को व्यक्त करना है मेरे लिए मुश्किल।
ए जिंदगी! और कितने आंसू दिलायेगा तू मुझे?
इन आसुओं से जी तो हो जाएगा हल्का पर दिमाग से हु में हारी।
ए जिंदगी! तेरी ये मुश्किलों की वजह से आते हैं कहीं बार अजीब से ख्याल,
पर सोचने लगती हूं क्या होगा मेरे माता-पिता का अगर हुआ मुझे कुछ।
ए जिंदगी! ज़रा तरस खा मुझ पे भी तू,
जीवन से ना तू मेरा विश्वास उड़ा की ये जिंदगी लगे मुझे बोझ हमेशा के लिए।
ए जिंदगी! प्यार तो है मुझे अपनों से बहुत,
पर उस प्यार को तरस थी हु हर पल जो है करीब होकर भी दूर है मुझसे, ए जिंदगी!
ए जिंदगी! खुश नसीब हूं कि मेरे सर पे हैं भगवान का आशीर्वाद,
वही देते हैं शक्ति ये सारी मुश्किलों को झेलने की।