दिल-ए-बाते
चुप चुप के देखा करती हूँ,
दिल से ज़्यादा मन की आँखों से देखा मैंने तुझे।
तुझे देखने से क्या होता इस दिल का हाल तू क्या जाने,
हर पल तुझे देख के मन करता है कि दिल दू सिर्फ तुझे हमेशा के लिए।
तेरी इन्ही नज़रों ने इस दिल को बना लिया गुलाम अपना,
क्या ये बंधन है इस जन्म का या है कोई पुराना रिश्ता हमारा?
तू है वो हवा के झोंको की तरह,
जिस हवा से सिर्फ आती है प्यारी की आंधी हमेशा।
तू है उन बारिश की बूंदों की तरह,
जिस में भीग जाना मुझे पसंद है हर पल।
तेरे लिए ये एहसास है मेरे लिए खास,
तू ही है मेरे लिए मेरे जीने की वो आस।