नानाजी, क्या वही थी हमारी आखिरी बात ?
हुई थी आखिरी बात हमारी,
आप कहते थे कि मैं हूं आपकी राजकुमारी।
आपका आशीर्वाद था मेरे लिए सोने से बढ़कर मूल्यवान,
हुआ करता था आपके पास हर समस्या का समाधान।
आपकी आवाज़ थी खुशियों से भरी,
शायद बेसूरी आवाज़ भी लगे मुझे एक बार सुरों से भरी।
कोई भी नाना-पोती की जोड़ी देख आते हैं आसु,
हर बात पर होता था आप पर भरोसा।
उस आवाज़ को सुनने के लिए तरसती हैं मेरे कान आज भी,
फिर आती है याद कि अभी कभी ना बजेगी वो फोन फिर से।
याद करती हूँ मैं ये बात हर साल,
हर बार आप बन जाते थे मेरी ढाल।
वो बातें आती हैं अभी भी मुझे याद,
फिर होता अफ़सोस है मुझे हर बार।
याद आती है मुझे आपकी हर दी हुई सीख,
अगले जन्म में बना रहे हम नाना-पोती का साथ।