माँ- नहीं है तेरी कोई तुलना |
माँ तेरी बातें हैं निराली,
तेरे किस्से हैं सुरीली |
तू करती है मेरा इंतज़ार जब भी बाहर जाऊ,
नहीं सुनती तू कि तू भी कर ले आराम ज़रा |
जहां भी मैं जाऊ तू आती है मेरे साथ,
साया भी चुक जाए पर तू ना |
जो भी मैं हु आज,
हू बस तेरी ही बदोलत |
परीक्षा हो मेरी,
पर उसमें भागीदारी होती है तेरी ज़्यादा।
जीवन के हर पल होती हैं बस तू,
हर पल बस सोचती है तू मेरे लिए।
भूल जाएगी अपने लिए तू कुछ लाना,
पर तू कभी नहीं भूलेगी लाना मेरी पसंदीदा चीज़।