लौट कर आइये ना नानाजी?
नानाजी के साथ बिताया हुआ हर पल बन चुकी हैं एक यादें,
अगर हो सके तो लौटा देना वो पल मुझे।
नानाजी आपका भोलापन आया है मुझ में,
हर चीज में खुशियां ढूंढते थे आप।
नानाजी आपकी समझदारी थी लाजवाब,
वो गुण आया मुझमें हैं इस कदर।
मुझे याद आया एक किस्सा,
बचपन में आयी थी मैं गाँव और यह किस्सा बन्न गया मेरी ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा |
नानाजी बैठे थे आप घर के आँगन मे,
खेलते- खेलते हुए मैं गई थी घर के अंदर कुछ क्षण के लिए गई और आप करते रहे इंतजार मेरा।
आए आप मुझे ढूंढते हुए घर के अंदर,
मुस्कुराते हुए कहा आपने कि मैं इंतजार कर रहा था मेरी बिटिया तेरे साथ खेलने के लिए।
पर उसकी सजा क्यों दिया आपने मुझे बड़े होने के बाद,
वादा किया था ना मुझसे आपने की वापस लौटेंगे आप क्यों ना फिर लौटे मेरे पास।
ढूंढने पर भी ना मिलेंगे अब आप घर पे,
फिर आप ही कहो कि कहां मिलेंगे आप मुझे फिर से।
काश ! माफ़ी मांगी होती मैंने आपसे उस गलती के लिए,
अब याद करती हूं तो वो गलती लगती है गुनाह से भी बढ़कर।
तब ना समझ पाई ये चीज़,
आपके जाने के बाद हुआ मुझे एहसास मेरी इस गलती का।
उस वक़्त ना पता था की इंतज़ार होता हैं ऐसा,
यह इंतज़ार से अच्छा तो आप मुझे सज़ा ही दे देते |
आपका प्यार हमेशा मेरे लिए है खास,
हर वक्त ऐसा लगता है कि आप हो कहीं मेरे ही आस- पास।