वो हसीन यादें और तुम
वो हसीन यादें और तुम
मुझे याद है आज भी, उस पहली मुलाक़ात के शर्ट का रंग,वो तुम्हारी पहली मुस्कान,
बड़ी प्यारी लगी थी मुझे तुम्हारी वो बेसाख़्ता हंसीजैसे मेरे सूखे जीवन में, पहली बार कोई खुशबू थी बसी।
याद है मुझे वो छोटी-छोटी बातों पर बेवजह झगड़ना,बात कुछ भी न हो, पर जानबूझकर तुम पर बिगड़ना।
अजीब था मेरा मिजाज़, पर ख़ुशी मिलती थी तुमसे लड़ने मेशायद बहाना ढूंढती थी, तुम्हारी तवज्जो पढ़ने में।वो पहली गुफ़्तगू, वो लफ़्ज़ों का धीरे से टकराना,
ना चाहते हुए भी, हमारा एक-दूसरे के करीब आना।
तुम्हारे साथ अब ये जहाँ बहुत खूबसूरत सा लगता है,
जैसे वक्त ठहर गया हो कहीं, बस यही सब अच्छा लगता है।
चाह कर भी नहीं भूल सकती वो लम्हे जो साथ गुज़ारे थे,वही तो मेरी असल ज़िंदगी, वही मेरे जीने के सहारे थे।
तुम्हारे आस-पास ही जैसे मेरी दुनिया सिमट गई है,
मेरी हर खुशी अब तुम्हारी परछाईं में सिमट गई है।
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