अच्छी सीख
अच्छी सीख राधेश्याम जी अपने पड़ोसी को यहाँ देखकर चौंक गए बोले "अरे बजरंगी तु यहां ,तु तो दिल्ली गया हुआ था ना , कब आया? और तु यहां कैसे पहुंच गया ?तुझे तो गांव के स्कूल में होना चाहिए था . " "अरे भैया इतने दिनो बाद मिले हो , कैसा हूं ये एक बार भी नहीं पूछे और सवाल पे सवाल किए जा रहे हो अभी-अभी तो हम आ रहे हैं. तुम्हें का पता कि कितना मुश्किल से भागकर हम यहाँ पहुंचे हैं." "पर इससे फायदा का हुआ." "और जब हम यहाँ आकर भी 28 दिन तक घर नहीं आ पाते अपने परिवार से मिल नहीं पाते तो उससे क्या फायदा हो जाता". " उससे तुम्हरे परिवार को वायरस से बचाया जाता" "पर स्टेशन पर जब जांच हुआ तो हम पोसिटीव नहीं थे ,तो फिर अब हमको का डर." " डर अभी भी है और पूरे 28 दिनो तक रहेगा" "पर वहां तो उतने लोगों के बीच रहने पर और ज्यादा डर होगा." "ऐसा नहीं है वहां लोगों को एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रखा जाता है , खाना-पीना से लेकर सबके सोने तक की व्यवस्था अलग -अलग की गयी है,इस तरह वहां किसी से बिमारी भी नहीं लगेगी और 28 दिन बाद तु बिना किसी डर के अपने परिवार से मिल सकेगा." "आप सही कह रहे है भैैया हम अभी घर गए भी नहीं हैं अब यहीं से लौट जाते है,अब 28 दिन बाद ही अपने परिवार से मिलेंगे, थैंकु भैया आपने हमें बडी अच्छी सीख दी."