लव शायरी
मै तो बस तेरी हो चुकी हु!
तेरे इश़्क के दरिया में, दिल को कुछ यू डुबो चुकी हु,,,
तु तेज बहती लहरो का पानी, मैं तेरी टाइटेनिक हो चुकी हु,,,
तु है बहती हवाओ सा चंचल, मैं सुखे पत़तो सी हो खो चुकी हु,,,
तू है नील गगन सा, तुझे पाने की चाह में पछियों से भी उंचा उड चुकी हु,,,
तेरे अक़श को ढुढ़ती बजांरन सी मैं, अपना घर भूल चुकी हु,,,
अक्सर तेरे साए का अधेरों तक पीछा करतीं हु,, तु सवेरा मैं तुझमे सांझ सी ढल चुकी हु,,,
हाँ, कुछ यूँ तेरी हो चुकी हु,,,