कविता :- मैं खुश हूँ ।
मैं खुश हूँ ,
कि तुम मेरे साथ नहीं ।
अगर होते ?
तो शायद मैं ना होती !
तुम सोचते हो
कि मैं परछाई हूँ ?
तुम देख नहीं सकते !
आज उस मुकाम पर हूँ ।
मैं खुश हूँ,
कि आज मैं अकेली हूँ ।
पर लोगों के दिलों में
अब भी बसती हूँ ।
मैं खुश हूँ ,
कि अब कोई न पूछेगा ,
नाम मेरा ?
ना ही अब पता मेरा
पुराना होगा !
हर पल जीने का होगा ।
तेरे संग बिताने का
अब कोई पछतावा ना होगा ।
इसीलिए मैं खुश हूँ ।