अंत भला तो भला
"अंत भला तो सब भला कहावत "कुछ गैर जिम्मेदार ठहराती है
कार्य की दिशा को नहीं परिणाम को ही ये सार्थक बताती है
यही से शुरुआत होती है येन केन प्रकारेण की धारणा
एक लक्ष्य एक स्वार्थ पे टिका देखो यही अवधारणा
सभा समाज सुधरेगा नहीं क्यो ऐसे रीति बना दिए
शुरुआत ही जब तुम गलत किए हार को जीत बना दिए।
जो कहते हो करते नहीं जो करते वो ना कहते हो
दर्द महफ़िल मेंवहीं दर्द् सहते हो
ये दोहरापन बातो का असर देखने को तो मिलता है
हरी बाग की चकाचौंध में सेमल का फूल खिलता है।