तुम ना हिन्दू ना मुस्लिम
तुम हिन्दू नहीं मुस्लिम नहीं तुम ना सिक्ख ईसाई
तुम ये रोज पढ़ते हो पढ़े हो सब भाई भाई
अभी जो वक्त आया है तुम्हारी इंतेहा लेने
तुम्हारे दिल में है वतन या झूठी तूने कसम खाई
वो अमर कुर्बानी याद कर लो
त्यागी बलिदानी याद कर लो
ऋषि मुनि की बानी याद कर लो
देवी देव दानी याद कर लो
तपोभूमि अपनी ये धरती तप गुण सब में ही आई
तुम्हारे दिल ने है वतन या झूठी कसम खाई