तुम कहाँ चले गए

दिल भी क्या खूब शरारत करता है

कहता तो है कि दिमाग की बात नही सुनूंगा

पर दिमाग को आराम भी कहां देता है

एक हलचल सी खामोशी है

तुम तक आने का रास्ता खोज ही लेता है

तुम हो या नही में

तुम हो

कहकर दिल को तसस्ली दे ही देता है

तुम्हारा जाना इसे गंवारा नही

तुम्हारा सहारा खूब ये मुझे देता है

दिमाग और दिल की भी क्या खूब बनती है

जिदंगी भी क्या खूब इम्तिहान लेती है

कट ही जाती है यादों के सहारे

तुम यहीं कहीं ही हो

इस एहसास को

दिल से नहीं जुदा होने कभी देती है

वनिता (एक नारी)

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Vanita Barde