तू नफरत करार देना

पीछले कुछ दिनो की बात है एक लड़की पसंद थी

पर वो कहती थी कि उसे ये इश्क़ इज़हार मोहब्बत इक़रार नहीं है मुझसे

मैं अच्छा तो लगता हूँ पर प्यार नहीं है उसे

तो एक दिन कहा उसे मैंने

मैं चुन चुन कर खुशियाँ लाता रहूँ

तू बिन बिन कर खामियाँ बताती रहना

जब जब मोहब्बत इज़हार करूँ

तू नफरत क़रार देना

गुलाब के गुलदस्ते लाता रहूँगा

पसंद न आए तू तमाचा मार देना

तेरी आँखों को भा जाए

ऐसा रूप सँवार लूँ

फिर चाहे तू मुझसे मोहब्बत न करे

थोड़ी हमदर्दी तो उधार देना

तुझे प्यार न हो मुझसे कोई बात नहीं

तू दोस्ती का बड़ा देना…

मैं सीधी बात करूँगा

तू उल्टा जवाब देना

तो ये भी एक किस्सा था एक कहानी थी

एक हिस्सा था मेरी ज़िंदगी का

वो पूछती है कितनी मोहब्बत है मुझे उससे

तुझे सोचूँ तो दिल धक धक करे

तुझे देखूँ तो थम जाऊँ

तू हाथ पकड़े तो गबराऊँ मैं

तू देखे तो खो जाऊँ

सिर्फ तेरी बातें सुनना चाहूँ मैं

तेरे बगैर खुदको बेकार पाऊँ मैं

सिर्फ तू ही प्यार करे इतना चाहूँ

हूँ मैं काम का तो

किसी के काम न आऊँ मैं

तुझे प्यार इतना हो जाए

तू सोए तो नींद

जागे तो तेरी सुबह हो जाऊँ

तू जाने को कहे फिर भी रुक जाऊँ मैं

दिल की तेरी धड़कन हो जाऊँ मैं

तू सिर्फ देखे और तेरा हो जाऊँ मैं

#LoveStoriesInVerse

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Vinay Sharma