आओ तुम्हे थोड़ा और ख़ुबसूरत बना दूँ
आओ तुम्हे थोड़ा और ख़ुबसूरत बना दूँ ,
बिठाऊँ इस चाँद को तुम्हारे सामने और बस रुला दूँ।
ये जो तारे हैं आसमान में तुम कहो तो इन्हें तुम्हारे दुप्पटे में सजा दूँ।
चुरा लाऊँ काजल इन काली रातों से और तुम्हारी आँखों में सजा दूँ,
अगर तुम कहो तो मांग लूँ कुछ चाँदनी इन चाँदनी रातों से और तुम्हारे चहरे पर लगा दूँ
तुम्हे थोड़ा और ख़ुबसूरत बना दूँ।
तुम कहो तो छीन लूँ इन सर्द हवाओं को ,
तुम्हारी रेशमी झुल्फों को इसमें उड़ा दूँ।
तुम कहो तो तुम्हे थोड़ा और ख़ुबसूरत बना दूँ।