चले जाओ तुम।

चले जाओ तुम अब मेरे दिल और दिमाग से,
बहुत थक चुकी हु मैं अपने ही हाल से,
ना सोचना चाहती हूं तुम्हें, ना याद करना चाहती हूं तुम्हें,
चले जाओ तुम मेरे ख़वाब और ख्यालों से,
आंसू और दर्द के सिवा अब कुछ नहीं बचा है,
तेरा दिया हुआ गम मुझे आधा कर चुका है,
नहीं रह सकती मै, इस दम घुटे एहसास में,
एक अरसा हो गया है खुद से हारते हुए,
चले जाओ तुम अब हमेशा हमेशा के लिए,
ताकि जी लू थोड़ी ज़िंदगी मैं भी अपने लिए।

 

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Wahida
Delhi