हमारी पृथ्वी और अंतरिक्ष का कैसे हुआ और किसने किया? (पाट 2)
कुछ महिनो बाद, मेरे यहाँ बहुत ज्यादा गरमी पड़ रही थी, इतनी ज्यादा थी की मैं बीमार पड़ गया। तो इसी गरमी के कारण मैंने तय किया की मैं इस गरमी से बचने के लिए किसी ठंडी जगह पर चला जांयु। तो मैं इस गरमी से बचने हिमालय चला गया। वहाँ पर चरो तरफ बरफ़ ही बरफ़ थी और वहाँ की कपकपाती ठंड में मुझे बहुत आनंद आ रहा था। तो मैंने सोचा की "यहाँ कुछ दिन ओर रुक कर यहाँ का फायदा उठाया जाये"। तो फिर यहाँ रुकने के घर की भी अवश्कता थी और यहाँ पर मेरा कोई नहीं था इसीलिए मुझे घर किराए पर ही लेना पड़ा। उसके चौथे या पाँचवे दिन, रात के चार बजे, मालकिन ने मेरा दरवाजा खटखटाया और कहने लगी "बेटा मैं तीन चार दिन के लिये किसी काम से यहाँ के एक पास के गाँव में ही जा रही हूँ, तब तक तुम मेरे घर का ख्याल रखना" और वह चली गई। घर के अंदर कोई नहीं था और बहुत अंधेरा भी था इसीलिए मुझे बहुत डर लग रहा था। इसी डर के कारण मैं घर के बाहर घूमने चला गया। तभी रास्ते में घुमते फिरते समय अचानक मेरे सामने एक वाहन आ कर खड़ा हुआ और उससे एक आदमी बाहर निकला। उसने मुझे अपना परिचय दिया और कहने लगा "शायद तुम्हे अपने कुछ सवालो के जवाब नहीं मिले इसलिए तुम बड़े परेशान हो"। मैंने कहा "हाँ! मुझे अपने कुछ सवालो का जवाब नहीं इसलिए मैं बड़ा परेशान रहता हूँ, क्या तुम मेरे सवालो का जवाब बता सकते हो?"। उसने तुरंत कहा "मैं किसी भी सवाल का जवाब दे सकता हूँ"।
मैंने उस्से जवाब पूछा चलो बताओ " हमारी पृथ्वी और अंतरिक्ष का कैसे हुआ और किसने किया?" उसने मेरे सवालो का जवाब देना सुरु किया "तुम्हारी पृथ्वी और अंतरिक्ष और उसके साथ साथ धरती, सूरज, तारो को तुम्हारी पृथ्वी के लोगो ने ही बनाया है, क्योंकि जब तुम भवष्य में जाओगे, तो तुम देखो गे की विज्ञनिको ने एक ऐसा यंत्र बनाया होगा जो धरती, सूरज, आशमान, तारे आदि चिजे बना सकता है और उसी यंत्र को लेकर विज्ञनिक समय यात्रा करने वाली मशीन की मदद से भूतकाल में गये और वहाँ धरती, सूरज, अंतरिक्ष, तारे आदि चिजे बनाई