सुकून की तलाश
हर दिल को है एक सुकून की तलाश
बेजान शरीर मे , डाल दे जो जान
है कहीं कुछ कमी सी
मुसाफिर को तलाश हो जैसे मंजिल की |
धूप मे चलते चलते थक जाते हैं कदम
मिल जाए छाँव तो लगता, सांस लें लें दम भर
सोचते सब होकर के बेताब
कभी तो पूरी होगी उनकी ये तलाश |
आएं वो पल जिनमे हम, सदियाँ जी लें
नशे के घूंट बेपरवाह पी लें
अधूरी सी लगती इस जिंदगी को
शायद मुकम्मल कर लें |