रिश्ते

हम सब ढेर सारे रिश्ते
ताश वाले जोकर की तरह
संभाल कर रखते हैं  
अजब हिस्सा हैं 
ज़िन्दगी का सफ़र ढोने को ——
मौसमी कपडों की तरह 
शादी या  जनाज़े में 
झगड़े में, कोर्ट कचेहरी में 
ये वक्त बेवक्त काम बहुत आते हैं —–
कई बार कुछ गले से नीचे नहीं उतरते
कई बार ज़बरदस्ती गले पड़ जाते  हैं
कई बार तन्हाइयों में गल जाते हैं 
……कई बार आसतीन से निकल 
    चुपके से डस जाते हैं
 

 

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Yuvraj Sharma