Himanshu Kumar jhaPoem 451मैंन पापा से बड़ा संसार ना मांगूंगामैंन पापा से बड़ा संसार ना मांगूंगा।Read More...
Himanshu Kumar jhaPoem 524टूटे हुए हैं पंख तो क्या हुआ हौसला नहीं हारी हैं।टूटे हुए हैं पंख तो क्या हुआRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 373एकांत सा जीवन चाहिए एकांत सा जीना चाहता हूँ।खामोशी आ गई हैं मुझमें मैं अपनेRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 348हे प्रिये मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूॅं तुम भी प्यार करो न।।हे प्रिये मैं तुम्हें बहुत प्यार करताRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 441तेरी चाहत में अंधे थे अब पागल से हो गए हैं।तेरी चाहत में अंधे थे अब पागलRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 377तेरे हुस्न का नूर तो बरे अच्छे लगते हैं।तेरे हुस्न का नूर तो बरे अच्छेRead More...