विज्ञान शतक सौ कविताओं का एक अनोखा संग्रह है, जहाँ जीवन, मनुष्य और ब्रह्माण्ड को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने का प्रयास किया गया है।
भर्तृहरि के शतकत्रय से प्रेरित यह पुस्तक दिखाती है कि मनुष्य मूलतः एक आण्विक संरचना है, प्रकृति अणुओं-परमाणुओं से बनी है, और संपूर्ण सृष्टि वैज्ञानिक नियमों पर चलती है।
इन कविताओं में आचरण, आस्था, विचार, प्रकृति से जुड़ाव, जीवन और मृत्यु—सब कुछ विज्ञान की रोशनी में व्याख्यायित है।
यह पुस्तक पाठक को जीवन को सरल, तर्कपूर्ण और पूर्वाग्रह-मुक्त दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती है।
विज्ञान और कविता का यह संगम एक ऐसा पाठ अनुभव रचता है जो बुद्धि को भी उत्तेजित करता है और संवेदना को भी छू जाता है।
About the Author
प्रस्तुत पुस्तक के रचयिता अरुण कुमार ने संत जेवियर्स कॉलेज से स्नातक (रसायन विज्ञान प्रतिष्ठा) और स्नातकोत्तर (रसायन विज्ञान) की पढ़ाई राँची विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर की। उन्होंने मोनाश विश्वविद्यालय (मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया) के मैटीरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग से पी एच. डी. की उपाधि प्राप्त की।
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (ट्रॉम्बे) में चयन और एक वर्ष के ओरिएंटेशन कोर्स के बाद 26 वर्षों तक परमाणु ऊर्जा विभाग के इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (कल्पाक्कम, तमिलनाडु) और तत्पश्चात राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र (इन्दौर, मध्य प्रदेश) में वैज्ञानिक के पद पर कार्य किया। उन्होंने अनेक शोध-पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में सह-लेखन और प्रकाशन का कार्य किया है।
उनकी हिन्दी कविता संग्रह की दो पुस्तकें (अथ वैज्ञानिक उवाच, 2023, एवं उवाच 2.0, 2025) प्रकाशित हैं जिनकी प्रशंसा युक्त समीक्षाएँ दैनिक अखबारों में छपीं। उनकी अंग्रेजी कविता की एक पुस्तक ऐन इन्ट्रेपिड इन्क्वायरी 2025 में छपी। उन्होंने अंग्रेजी में ऑटोबायोग्राफिकल नोट्स ऑफ ए साइंटिस्ट नामक पुस्तक भी 2025 में प्रकाशित की है।
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