बस आज को थाम लो – Aklesh Jain

बस आज को थाम लो

कल की सोच में आज धीरे-धीरे फिसल जाता है,  

हथेली में ठहरे लम्हे भी कब खिसक जाता है।  

सोचता हूँ कल सुकून से जी लूँगा,  

पर आज का दीप यूँ ही बुझ जाता है।  

थोड़ा थमकर देखूँ तो ये समझ आता है,  

ज़िंदगी अभी, इसी पल में मुस्कुराता है।  

कल तो आएगा ही अपनी चाल से,  

पर आज का सूरज भी ढल जाता है।  

इसलिए हर पल को धीरे से थाम लो,  

छोटी खुशियों में दिल को बहने दो।  

कल का भरोसा नहीं, ये बस जान लो,  

आज को जीना ही जीना कहने दो।

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