You Have to Be Willing to Be Leave

कभी-कभी तुम्हें विश्वास करने के लिए नहीं कहा जाता।

कभी-कभी तुम्हें जाने के लिए तैयार होना पड़ता है।

To be leave.

उन जगहों से, जहाँ तुम्हें अब भी प्यार किया जाता है—लेकिन समझा नहीं जाता।

उन लोगों से, जिनके साथ तुम्हारी सबसे खूबसूरत यादें हैं—लेकिन तुम्हारा भविष्य नहीं।

उन कमरों से, जहाँ तुम्हारा बचपन अब भी तुम्हारा इंतज़ार करता है, मगर तुम खुद वहाँ वापस जाकर अपने पुराने रूप में नहीं रह सकते।

छोड़ना हमेशा किसी चीज़ से दूर जाना नहीं होता।

कभी-कभी छोड़ना मतलब होता है—

अपने भीतर उस व्यक्ति को विदा करना, जो हर बार टूटकर भी उसी दरवाज़े पर लौट आता था।

तुम्हें जाने के लिए तैयार होना होगा।

बिना यह जाने कि आगे क्या है।

बिना यह निश्चित किए कि कोई तुम्हें पकड़ लेगा।

बिना इस उम्मीद के कि जिसके लिए तुम जा रहे हो, वह कभी तुम्हें समझेगा।

क्योंकि कुछ यात्राएँ मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं होतीं।

कुछ यात्राएँ सिर्फ़ इसलिए होती हैं कि तुम उस जगह से निकल सको जहाँ तुम धीरे-धीरे ख़ुद को खो रहे थे।

और शायद यही सबसे कठिन विदाई होती है—

जब तुम किसी इंसान को नहीं,

अपने ही एक पुराने संस्करण को अलविदा कहते हो।

तुम पीछे मुड़कर देखते हो।

वही गलियाँ।

वही खिड़की।

वही शाम।

वही आकाश।

सब कुछ वहीं होता है।

बस तुम नहीं।

और तब समझ आता है—

कुछ जगहें हमें रोकने के लिए नहीं होतीं।

वे हमें यह सिखाने के लिए होती हैं कि एक दिन,

you have to be willing to be leave.

क्योंकि कभी-कभी

बचे रहने का अर्थ

वहीं रहना नहीं होता।

कभी-कभी—

तुम्हें जाना पड़ता है

ताकि तुम फिर से अपने पास लौट सको।

-অন্তরীপ

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Anamitra Mukherjee