अध्याय 12
ब्रज का स्वाद और बृजवासियों का प्रेम
वृंदावन केवल मंदिरों का धाम नहीं है, यह स्वाद का भी धाम है। यहाँ की कचौड़ी, यहाँ की लस्सी, यहाँ का पेड़ा – हर चीज़ में प्रेम घुला हुआ है। और यहाँ के बृजवासी – वे तो बिना रिश्ते के भी अपना बना लेते हैं। एक बार राधे-राधे कहो, तो वे आपको अपने घर तक ले जाएँगे। यही तो ब्रज है, जहाँ हर अजनबी भी अपना लगता है।