प्राक्कथन

पुस्तक: दो पथिक, एक ब्रजधाम

लेखिका : अंकिता सिंह

ये पुस्तक प्रेम के बारे में नहीं, प्रेम की परिभाषा के बारे में है।

और ब्रज में प्रेम की परिभाषा सिर्फ एक ही है

–राधा और श्याम ।

“दो पथिक, एक ब्रजधाम” – ये दो पथिक हम और आप नहीं हैं। ये दो पथिक हैं – एक तरफ हमारे कान्हा, जो सर्वेश्वर होकर भी अपनी राधा के बिना अधूरे हैं, और दूसरी तरफ हमारी राधा रानी, जो प्रेम की स्वयं मूर्ति हैं।

ये संसार का प्रेम नहीं है, ये वो प्रेम है जो निस्वार्थ है, पवित्र है, और अनंत है।

अंकिता ने इस पुस्तक में उसी दिव्य प्रेम को उतारने की कोशिश की है। वो प्रेम जहाँ कान्हा बांसुरी बजाते हैं तो सिर्फ राधा के लिए, और राधा श्रृंगार करती हैं तो सिर्फ कान्हा के लिए। दो देह, पर एक प्राण। दो नाम, पर एक धाम – ब्रजधाम।

इस पुस्तक का हर शब्द श्री राधे को समर्पित है।

 

राधे-राधे,                              प्रियंका सिंह

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Ankita Singh