भूमिका

हर व्यक्ति जीवन में कहीं न कहीं पथिक ही तो है। कोई अपने सवालों के जवाब ढूंढ रहा है, कोई अपनी मंज़िल।

इस पुस्तक के भी दो पथिक हैं। एक पथिक वह लड़की है जो जीवन के शोर से थक कर पहली बार वृंदावन आती है। दूसरा पथिक वह है जिसका जीवन ही ब्रज है।

एक का रास्ता तर्क का है, दूसरे का प्रेम का। और फिर शुरू होती है उनकी एक साथ यात्रा – बरसाने की गलियों से, गोवर्धन की परिक्रमा तक।

ये पुस्तक कोई साधारण प्रेम कहानी नहीं है। ये उस दिव्य प्रेम की कहानी है जो श्री राधा रानी ने श्री कृष्ण से किया – निस्वार्थ, पवित्र और अनंत। ये भूमिका नहीं, एक निमंत्रण है – आइये, दो पथिकों के साथ एक ब्रजधाम की यात्रा पर।

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Ankita Singh