लेखिका परिचय
अंकिता सिंह
अंकिता सिंह का जन्म 27 अगस्त 2001 को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक संस्कारी मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। इनका संबंध उत्तर प्रदेश की मिट्टी से जुड़े एक बड़े और आत्मीय संयुक्त परिवार से है।
इनके पिता दो भाई हैं, और यह परिवार आज भी संयुक्त परिवार की परम्परा, प्रेम और मूल्यों को संजोए हुए है। अंकिता तीन बहनों में से हैं – तीन बहनों का यह स्नेह, नोंक-झोंक और एक-दूसरे के प्रति समर्पण ही उनकी लेखनी कोमलता देता है। एक बड़ी जॉइंट फैमिली में पली-बढ़ी होने के कारण इन्होंने बचपन से ही रिश्तों की गहराई, त्याग और एकता को करीब से देखा है, जो इनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से झलकता है।
पिता की नौकरी के कारण इनका परिवार वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में निवासरत है, पर परिस्थितियों ने इन्हें वहीं का बना दिया है। फिर भी, दिल में आज भी मऊ और बलिया की वो गलियाँ और ब्रज की खुशबू बसी हुई है।
इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 से प्राप्त की। पिता के तबादलों के कारण इतनी कम उम्र में ही इन्होंने लगभग पूरे भारत का भ्रमण किया है, जिसने इन्हें जीवन को अलग-अलग नज़रों से देखना सिखाया।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में कार्यरत होने के साथ-साथ, वे सिलीगुड़ी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ‘होटल मैनेजमेंट’ की पढ़ाई कर रही हैं। होटल मैनेजमेंट जैसे व्यावसायिक क्षेत्र में होने के बावजूद, कविताएँ लिखना इनका स्वाभाविक गुण है – जब भी समय मिलता है, वे अपनी डायरी उठा लेती हैं और शब्दों में एक नई दुनिया बुन देती हैं। इनकी प्रथम काव्य कृति कुछ पन्ने मेरी काफी सराही गई थी। और अब ‘दो पथिक, एक ब्रजधाम’ इनकी लेखन यात्रा का दूसरा पड़ाव है – जो केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि उनका अपना आत्मीय यात्रा-वृत्तांत है।
वर्तमान निवास: सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल
जन्मतिथि: 27 अगस्त 2001