समर्पण

उन सभी राहों को, जो भटकाती हुई भी सही मंज़िल तक ले जाती हैं।

उन सभी शामों को, जब ब्रज की हवा में राधे-राधे की धुन के साथ किसी अपने की याद बहुत आती है।

उन दो पथिकों को समर्पित,

जिनकी राहें दुनिया की नज़रों में अलग-अलग हैं,

पर जिनका हर कदम, हर साँस, हर प्रार्थना

एक ही धाम, एक ही नाम की ओर जाती है।

और उस हर सहयोगी को,

जिसने बिना कुछ कहे, बिना नाम चाहे,

इस कहानी को कागज़ से पहले अपने दिल में जगह दी,

जिसकी एक सलाह, एक हौसले से ये दो पथिक

आखिरकार अपने ब्रजधाम तक पहुँच पाए।

 

क्योंकि कुछ कहानियाँ लेखक नहीं लिखता,

समय, किस्मत और कुछ खास लोग मिलकर लिखते हैं

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Ankita Singh