मुखौटों

कभी एक समय था जब मुखौटे केवल मुखौटों ही हुआ करते थे। लेकिन अब मुखौटों ने रोजमर्रा की जिंदगी में एक जगह बना ली है। मुखौटों के कई प्रकार हैं—एक खुश चेहरे के लिए, एक गुस्से के लिए, एक उत्साह के लिए, एक उदासी के लिए और एक दुख के लिए। इन मुखौटों के पीछे क्या है, यह हमेशा अनजाना ही रह जाता है।मैं देखती हूँ कि जब आप तैयार होते हैं, तो कार्यालय के दरवाजे में प्रवेश करने से पहले एक मुस्कान पहन लेते हैं। मैं देखती हूँ कि आप अपने चेहरे के भावों को इतना स्थिर रखते हैं ताकि भावनाओं की दरारों के पीछे छिपी सच्चाई बाहर न आ जाए। मैं देखती हूँ कि कठिन परिस्थितियों के बारे में सोचते हुए भी आप अपने दोस्तों के साथ जोर-जोर से हंसते हैं। मैं देखती हूँ कि आप लोगों से भरे बैठक कक्ष (लिविंग रूम) में खुलकर मुस्कुराते हैं।लेकिन इन सभी मुखौटों के पीछे एक असली चेहरा होता है, जिसे सुने जाने, समझे जाने, दुलारे जाने, प्यार किए जाने और मानसिक शांति पाने की आवश्यकता होती है। जब कोई व्यक्ति अपने बुरे दौर में होता है, तो उसे एक सहारे की जरूरत होती है, एक ऐसे मुस्कुराते चेहरे की जो कहे, ‘सब ठीक हो जाएगा’। बस थोड़ी सी हिम्मत, विचार करते मन को सुनने वाला कोई अपना, और यह विश्वास कि ‘सब ठीक है’, यही सब तो चाहिए होता है।बस एक बार सोचें और यह पृथ्वी रहने के लिए एक खुशहाल जगह बन जाएगी। मुखौटे केवल मुखौटे ही रहेंगे, वे साधन नहीं जिन्हें हमें अच्छा दिखने के लिए पहनना पड़े। इस दुनिया में जहाँ आप कुछ भी हो सकते हैं, दयालु बनने का प्रयास करें।

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Dr Archana Bhat
Jammu and Kashmir