Tweet Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Print (Opens in new window) Print Views 379जय होपुण्य है पवित्र है मोह हैं छाया हैं उदय हैं अंत है भगवान है भक्त है , माथे पर जिसकी चंद्र मुकुट हो और हाथो मे धनुष धारण करते है। मोर मुकुट भी जिसकी सोभा पाती हैं। वही तो भगवान हैं। Related Leave a ReplyCancel reply