Views 430जय होपुण्य है पवित्र है मोह हैं छाया हैं उदय हैं अंत है भगवान है भक्त है , माथे पर जिसकी चंद्र मुकुट हो और हाथो मे धनुष धारण करते है। मोर मुकुट भी जिसकी सोभा पाती हैं। वही तो भगवान हैं। Related Leave a ReplyCancel reply