सपना देखती हूं

सपना देखती हूं, क्या सच होगा,

भारत बातों में नहीं, यथार्थ में आगे होगा।

क्या हम स्वतंत्र होकर भी,

स्वतंत्रता से जी सकेंगे।

जीवन के आदर्श और संस्कार,

क्या हम में, विकसित होंगे।

बेरोजगारी की मार से जहां, 

कोई युवा, आहत न होगा।

सबको छत, सबको भोजन,

फटेहाल, कोई न होगा।

डर न होगा जहां अंधेरी रातों में,

चिंता में कोई पिता न होगा।

हिन्दुस्तानियों की कहानियां,

घर घर में प्रेरणा देंगी।

लोहा मानेगी दुनिया,

भारत माता की जय जयकार होगी।

#IndependenceWritingContest2026

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Kumari Shalini