एक दोस्त की कमी-सी थी
एक दोस्त की कमी-सी थी
एक कमी-सी थी, एक नमी-सी थी,
मैं तो अकेला ही चल रहा था,
ज़िंदगी आम-सी थी।
किसी ने रोका, किसी ने पूछा,
इसकी तो आदत नहीं थी।
जिसने बेमतलब पुकारा,
जिसने बेमतलब हाल पूछा,
मिलते ही बस एक हम-आहंगी-सी थी।
बस एक दोस्त की कमी-सी थी।
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