ज़िंदगी ने बदल दिया
ज़िंदगी ने बदल दिया
हम तो नादान थे, ज़िंदगी ने बदल दिया,
हम तो अनजान थे, ज़िंदगी ने तल्ख़ हक़ीक़त दिखाया।
मासूम रहते तो क्या जाता किसी का?
ज़िंदगी ने झंझोड़ा तो समझ में आया,
ना-इल्म रहना गुनाह होता।
किसी को कोसने से क्या होता,
ज़िंदगी का भी क्या कसूर था, उसने तो बस रास्ता दिखाया।