मै तो हँसता हूँ

मैं तो हँसता हूँ, मगर दिल अंदर ही अंदर रोता है,

बेगाने क्या जाने — दर्द कितना गहरा होता है।

चेहरे पर मुस्कान रखकर सबको जीत लेता हूँ,

पर दिल की वीरानियों से रोज़ हार जाता हूँ।

लोगों से मिलता हूँ, बातें भी करता हूँ,

मगर अपना हाल किसी से नहीं कहता हूँ।

ये दुनिया, ये लोग, ये महफ़िल — सब वीराना लगता है,

घर-आँगन, वो दीवारें — अब पुराना लगता है।

आईना भी मेरी सूरत से नज़रें चुराता है,

मैं खुद को ही अपने अंदर बेगाना पाता हूँ।

मैं तो हँसता हूँ… मगर दिल अंदर ही

अंदर रोता है।

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Prince kumar