अपना हिंदुस्तान

जिस जहां की हर चीज है प्यारी

प्रकृति सौंदर्य भी महिमा न्यारी

प्यारी है जिसकी जुबां

वही है अपना हिंदुस्तान ।

जहां कश्मीर की प्रकृतिबाध्य वादियां है

कन्याकुमारी की मंत्रमुग्ध करने

वाली रविकिरणों की लालिमां है

विराजे जहां सतपुड़ा के पहाड़ है

पूरब के शेरों की अतितीव्र दहाड़ है।

जहाँ अम्बर की चादर है

नज़र तक फैला सागर है

गगन भी प्रकृति को चूमते है

मंद पवन के झोंके भी

झरनों के साथ झूमते हैं।

अतिरमणीय है इन्द्र धनुष जहाँ

वही है अपना हिंदुस्तान ।

जहां गूंजें बच्चों की कौतूहल है

वो सुदृश्य सा ताजमहल है

विशाल पर्वत से एक सड़क है 

प्यार का है एक निशान जहाँ

वहीं है अपना हिंदुस्तान।

जहां कभी रंगों की होली है

तो कभी दीयों की उजाली है

जहां सिक्खों की बैसाखी है

हर बहन से भाई को राखी है

जहां ईद का चांद भी है

नदियों के निर्मल जल की बांध भी है

साथ मिल जुल कर गाएं

एकत्व का गीत जहां

वही है अपना हिंदुस्तान।

जहां कृषि प्रधानता अधिकांश है

अनेक धर्म का दिखता एक अंश है

कर्मों की भी है श्रेष्ठता जहां

मल सफाईकर्मियों को भी सलाम है वहां

किसान ही भाग्य विधाता जहां

परोपकार कर बनता अन्नदाता यहां

ऐसे सभी कलाकारों को नमन है

कार्यरत रहते जो बनाने

देश की शांति-अमन है

स्वतंत्रता का प्रतीक भी है समां

वही है अपना हिंदुस्ता; ।

जहां किसी गली में भंगडा है

तो कहीं गुल्ली डंडा तगड़ा है

जहां की अनगिनत भाषाएं हैं

हार के बाद भी जीत की आशाएं है

जहां मंदिर में बजती घंटी है

मस्ज़िद में है होता अजां

वही है अपना हिंदुस्ता; ।

गौरवशाली रहा है गुरुकुल विद्या मंत्र जहां

पंचवर्षीय शासन है लोकतंत्र जहां

अनेक देशों का गुण धर्म है जहां

सभी को समानता का अधिकार वहां

वही है अपना हिंदुस्ताः।

जहां हज़ारों किस्मों के आम है

हर पल मौज़ करना झूम झाम है

जहां विज्ञान के चमत्कार भी कम नहीं

दिनोदिन खोज़ प्रतिभा भी वृतांत सही

आशाएं है अभी भी बची मंगल यान के लिए

जहां देशवासी जीते हिंदुस्तान की शान के लिए

जहां का रंगीला है हर समा

वही है अपना हिंदुस्ता।

लो फिर से स्वतंत्र दिवस आया

आज फिर गौरवपूर्ण तिरंगा लहराया

लेकर हाथों में घूमे – फिरे यहां-वहां

वही है अपना हिंदुस्ता

वही है अपना हिंदुस्ता।।

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